बुधवार, 7 अगस्त 2013

आप कैसा महसूस कर रहे हैं?

पाकिस्तानी घुसपैठियों द्वारा किए गए हमले में हमारे ५ जवान शहीद हो गए। इस तरह की खबरें मीडिया के लिए मानो संजीवनी का काम करतीं हैं। सारे राष्ट्रीय चैनल व पत्रकार इसका प्रभाव समझने के लिए निकल पड़े। होना भी यही चाहिए, देश की जनता को देश की सुरक्षा संबंधी घटनाओं से परिचित कराना हमारे इस चौथे स्तंभ का ही कार्य है। परन्तु जिस प्रकार की रिपोर्टिंग हमारे अधिकांश खबरनवीस कर रहे हैं उसे देखकर ऐसा लगता है कि इस प्रकार की सामरिक,संवेदनशील व राष्ट्रीय महत्व की घटनाओं को "कवर" करने की योग्यता का हमारे अधिकतर पत्रकारों व न्यूज़ चैनलों में अभाव है। कुछ पत्रकार बंधु शहीद हुए सैनिकों के गांव पहुंचकर उनके घर के हालात देशवासियों को दिखाकर इसलिए अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे थे क्योंकि वे वहां सबसे पहले पहुंचे हैं। घर में रोती-बिलखती;बेसुध पड़ी महिलाओं का चित्रण करना उन्हें शायद अपनी खबर में वज़न का अहसास कराता होगा। इतना नहीं कुछ पत्रकार शहीद हुए जवान के माता-पिता के गमगीन चेहरों के आगे माइक लगाकर "बाइट" लेने की कोशिश करते हुए पूछते हैं कि "आप कैसा महसूस कर रहे हैं?" महदआश्चर्य है! भला एक पिता जिसका जिसका पुत्र शहीद हो गया हो; एक पत्नी जिसका सुहाग उजड़ गया हो, कैसा महसूस करेगें? एक मीडिया समूह ने एसएमएम के जरिए सर्वे शुरू कर दिया कि क्या पाकिस्तान पर कार्रवाई की जानी चाहिए? जवाब में तकरीबन १ लाख लोगों के एसएमएस पहुचं गए कि "हां" कार्रवाई की जानी चाहिए। ये बात अलग है कि यदि इस बात का सर्वे किया जाए कि इन १ लाख लोगों में से कितनों के परिजन भारतीय सेना में हैं या आवश्यकता होने पर सेना में जा सकते हैं तो परिणाम अत्यंत निराशाजनक आएंगे। इस प्रकार की पत्रकारिता से आप क्या साबित करना चाहते हैं? मेरा यही निवेदन है इस प्रकार की घटनाओं को इस प्रकार "कवर" किया जाना चाहिए जिससे आम आदमी कुछ प्रेरणा ले सके व उसे देश के प्रति अपने कर्तव्य का बोध हो, ना कि इस देश की जनता दिखाई गई खबरों को नाटक का अंश समझकर मनोरंजन मात्र करे।

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