बुधवार, 21 अगस्त 2013

मानस में नारी

 भ्राता,पिता,पुत्र उरगारी।
पुरूष मनोहर निरखत नारी॥

ढोर,गंवार,शूद्र,पशु,नारि।
सकल ताड़ना के अधिकारी।।

काम,क्रोध,लोभ आदि मद, प्रबल मोह कै धारि।
तिन्ह मह अति दारुन दुखद मायारूपि नारि॥

नारि सुभाऊ सत्य सब कहहीं, अवगुन आठ सदा उर रहहीं।
साहस,अनरत,चपलता,माया, भय अविवेक,असौच, अदाया॥
(रामचरितमानस)

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