मंगलवार, 23 जुलाई 2013

राष्ट्रीय अपमान

हाल ही में खबर आई थी कि बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह अपने अमरीका प्रवास के दौरान राष्ट्रपति बराक ओबामा से मोदी के वीज़ा को लेकर चर्चा करने वाले हैं। इसकी खबर लगते ही लोकसभा के ४० और राज्यसभा के २५ भारतीय सांसदों ने ओबामा को फैक्स कर मोदी को वीज़ा ना दिए जाने की अपील की है। मोदी के वीज़ा का विरोध करने में इतनी जल्दी तो वहां के सीनेटरों ने भी नहीं की जितनी जल्दबाजी में ये तथाकथित धर्मनिरपेक्ष सांसद दिख रहे हैं। यहां एक बात और विचारणीय है कि मोदी को अमरीका का वीज़ा मिलने से इन पर कौन सी आफत आ जाती, क्या ये अमरीका के हक में अपनी वफ़ादारी सिद्ध करना चाहते हैं या वहां की सीनेट का सदस्य बनना चाहते हैं। परन्तु मैं इन सांसदों व इनकी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टी की मजबूरी समझ सकता हूं आखिर ये दल ज़िंदा ही हैं तुष्टिकरण की राजनीति पर। इन सांसदों के इस कदम  से विश्व में भारत की साख को क्षति पहुंची है, देश का अपमान हुआ है। दलगत राजनीति करना कोई बुरी बात नहीं और ना ही राजनीतिक मतभेद या विरोध करने में कुछ हानि है परन्तु अपने घर का झगड़ा किसी तीसरे को दिखाना ये अपने घर के साथ गद्दारी है। ये सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण की फ़िक्र करते हैं यदि किसी दिन इस देश में बहुसंख्यक एकजुट होकर वोट करने लगेगें तो फ़िर देखिए ये किस तरह अपने सुर व नीतियां बदलते हैं। हमारे देशवासियों को चाहिए कि इनकी सियासी चालों को समझें व इन्हें अपनी ओछी राजनीतिक बिसात बिछाने के लिए अवसर ना दें जिससे देश की अखंडता अक्षुण्ण रह सके।

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