रविवार, 16 जून 2013

राष्ट्रवाद बनाम छ्द्म धर्मनिरपेक्षता

आख़िरकार जदयू-भाजपा गठबंधन टूट गया। दोनों दलो की विचार हौदियां (थिंक टैंक) इससे होने वाले नफ़ा नुकसान का आंकलन करने में जुट गए। राजनीतिक पंडितों और न्यूज़ चैनलों को लंबे समय तक चलाने के लिए मसाला मिल गया। लेकिन इन सब के बीच देशहित का क्या? जनहित का क्या? जिस मुद्दे को इस अलगाव का आधार बनाया गया है वह एक छ्द्म आधार है। नितीश भले ही कितनी सफ़ाई दें पर जब भी ये सवाल खड़ा होगा कि यदि धर्मनिरपेक्षता का इतना ही ख़्याल था तो उस समय ही अलग हो जाते जिस समय गुजरात में दंगे हो रहे थे। भले ही वाजपेयीजी का बहाना बनाकर नितीश इसका जवाब देने की असफल कोशिश करें लेकिन वाजपेयी जी को सक्रिय राजनीति से दूर हुए भी काफी वक्त गुज़र चुका है, तब अलग हो जाते! खैर, वो कोई मोदी या धर्मनिरपेक्षता के कारण अलग नहीं हुए हैं ये वो भी जानते हैं। परन्तु इस देश की जनता तो सदियों से मूढ़ समझी जाती रही है और उसका आचरण भी कमोबेश वैसा ही है। ये बात मेरी समझ से परे है कि कैसे हिंदुत्व की बात करना सांप्रदायिक है और अल्पसंख्यकों की बात; और उनमें भी सिर्फ़ और सिर्फ़ मुस्लिमों की बात करना धर्मनिरपेक्षता। पता नहीं इस देश की जनता ये क्यों नहीं सोच पाती। भाजपा ने भी समय-समय पर गंभीर गल्तियां की हैं जिसकी वजह से आज उसकी ये हालत है। ज़रा याद कीजिए वाजपेयीजी का वो दौर जब उन्होंने एक वोट के कारण सरकार की बलि चढ़ा दी मगर सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। आखिर क्यों भाजपा अगला चुनाव "राष्ट्रवाद बनाम भ्रष्टाचार;राजद्रोह;अराजकता;छद्म धर्मनिरपेक्षता" जैसे मुद्दों पर नहीं लड़ती? विपक्षी आरोप लगाते हैं कि आप सांप्रदायिक हैं और आप चल पड़ते हैं सफ़ाई देने। आप क्यों इस बात को नहीं कहते इस राष्ट्र के हित में जो भी हैं वो सब हमारे हैं और जो राष्ट्रहित के विरोधी हैं वो हमारे शत्रु हैं। आप देश के सामने उचित व सही तथ्यों को रखिए। जब भी गुजरात दंगों की बात आती है तो आप क्यों गोधरा का ज़िक्र करना भूल जाते हैं? यहां मेरा तात्पर्य ये कतई नहीं गुजरात में जो हुआ वह सही है। परन्तु गोधरा में जो हुआ वह भी सही नहीं था। बहरहाल, ये राजनेताओं की चालें हैं और वो अपने निजी लाभ के लिए इन्हें चलते रहेंगे। मेरी सभी देशवासियों से अपील है कि वो इन छद्म चेहरों को जल्द से जल्द पहचान ले और राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर अपनी अगली सरकार चुनें।

-हेमन्त रिछारिया

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