सोमवार, 1 अप्रैल 2013

संजय दत्त को माफ़ी क्यों...?

 प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने संजय दत्त की माफ़ी को लेकर मुहिम क्या शुरू की सत्तारूढ़ दल कांग्रेस ने भी उनके सुर में सुर मिला दिया। इस मुहिम का फायदा भले ही कांग्रेस व जस्टिक काटजू को मिले ना मिले पर इसका अच्छा-खासा नुकसान संजय दत्त को ज़रूर भुगतना पड़ेगा। ये बात शायद संजू बाबा भी बखूबी जानते हैं तभी तो उन्होंने पत्रकार वार्ता में हाथ जोड़कर इस मुहिम से छिड़ी बहस को तत्काल बंद करने के लिए बड़ी ही आर्त गुहार लगाई। माफ़ी की इस मुहिम ने जहां एक ओर इस देश की जनता की याददाश्त पे पड़ी गर्द को साफ किया वहीं आम नागरिकों व बुद्धिजीवियों को इस बात पर सोचने के लिए विवश भी किया कि क्या वाकई संजय दत्त निर्दोष या मासूम हैं?आए दिन मीडिया में हो रहे खुलासों को देखकर तो यही लगता है कि संजय दत्त ने मुंबई बम कांड की साजिश में भले ही हिस्सा ना लिया हो पर उन्होंने इसे रोकने की दिशा में कोई सार्थक पहल भी नहीं की थी। उस समय लगभग ३४ साल के इस तथाकथित मासूम ने ना सिर्फ अबू सलेम जैसे अपराधी को अपने घर बुलाया वरन बमकांड के गुनहगारों से लगातार संपर्क बनाए रखा, इतना ही नहीं जमानत पर रिहा होने के बावज़ूद भी उसके यह संबंध जारी रहे। काटजू साहब ने बैठे बिठाए संजय दत्त की छवि की जो गत बनाई है उसे शायद ही कोई सुधार पाए। उनकी इस मुहिम से मीडिया को लंबे समय तक चलने वाला मसाला मिल गया और देश की जनता जो धीरे-धीरे इस गुनाह की गंभीरता को भूलती जा रही थी उसे भी एक ही झटके में सब कुछ याद दिला दिया। जो नागरिक संजू बाबा के साथ सहानुभूति रखने लगे थे इन कुछ दिनों में वे आए दिन होने वाले खुलासो को देखकर अपने आप को ठगा सा महसूस करने लगे हैं। वहीं कुछ विद्वान जो माफ़ी के पक्षधर हैं ये कहते नहीं थकते कि सजा तो वे पिछ्ले २० सालों से भुगत रहे हैं। अब ज़रा इन २० सालों पर भी गौर करें तो आप पाएंगे कि इन गुज़रे बीस सालों में संजय दत्त विवाह बंधन में बंध चुके हैं। उनकी २ संताने हो चुकी हैं। वे कई फिल्में भी साइन कर चुके हैं। कुछ फिल्में रिलीज़ होने के साथ-साथ सुपरहिट भी हो चुकी है जिससे उनके करियर में उन्नति हुई है। वो कई बार शूटिंग के सिलसिले में विदेश की सैर भी कर चुके हैं। एक राजनीतिक दल में शामिल होकर महासचिव का पद भी संभाल चुके हैं। यदि इन्ही सब बातों को सज़ा भुगतना कहते हैं तो ईश्वर से ऐसी सज़ा कौन नहीं चाहेगा। मेरा मानना है कि जो अच्छी छवि व सहानुभूति एक गुनहगार को अपने गुनाह को कबूल करके व उसके प्रायश्चित स्वरूप मिली उस गुनाह की सज़ा को भुगत कर प्राप्त होती है वह इस प्रकार रसूख का इस्तेमाल करके मिली माफ़ी से प्राप्त नहीं होती। संजय दत्त के शुभचिंतको को चाहिए कि वे उन्हें सज़ा भुगत कर प्रायश्चित करने दें जिससे इस देश की जनता उन्हें ह्रदय से माफ़ कर सके।

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