मंगलवार, 12 मार्च 2013

बुराईयों के अंत का प्रतीक है होली



डा.जगदीश गांधी
होली भारत के सबसे पुराने पर्वों में से एक है। होली की हर कथा में एक समानता है कि उसमें "असत्य पर सत्य की विजय" और "दुराचार पर सदा़चार की विजय" का उत्सव मनाने की बात कही गई है। इस प्रकार होली मुख्यतः आनंदोल्लास तथा भाई-चारे का त्यौहार है। यह लोक पर्व होने के साथ ही अच्छाई की बुराई पर जीत सदाचार की दुराचार पर जीत व समाज में व्याप्त समस्त बुराईयों के अंत का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता व दुश्मनी को भूलकर एक-दूसरे से गले मिलते हैं।
 किसी कवि ने कहा है-
         "नफरतों के जल जाएं सब अंबार होली में,
         गिर जाए मतभेद की हर दीवार होली में।
         बिछुड़ गए जो बरसों से प्राण से अधिक प्यारे,
         गले मिलने आ जाएं वे इस बार होली में॥

-डा.जगदीश गांधी
संस्थापक-प्रबंधक
सिटी मान्टेसरी स्कूल, लखनऊ (उ.प्र.)

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