शनिवार, 9 फ़रवरी 2013

मैं अमर शहीदों का चारण

राष्ट्रकवि श्रीकृष्ण "सरल"

मैं अमर शहीदों का चारण, उनके यश गाया करता हूं
जो कर्ज राष्ट्र ने खाया है, मैं उसे चुकाया करता हूं।
यह सच है याद शहीदों की हम लोगों ने दफ़नाई है
यह सच है उनकी लाशों पर चलकर आजादी आई है।

पूजे ना गए शहीद तो फिर आजादी कौन बचाएगा?
तोपों के मुंह से कौन अकड़ अपनी छातियां अड़ाएगा?
चूमेगा फंदे कौन; गोलियां कौन वक्ष खाएगा?
अपने हाथों अपने मस्तक फिर आगे कौन बढ़ाएगा?

पूजे ना गए शहीद तो फिर आजादी कौन बचाएगा?
फिर कौन मौत की छाया में जीवन के रास रचाएगा?
पूजे ना गए शहीद तो फिर यह बीज कहां से आएगा?
धरती को मां कहकर, मिट्टी माथे से कौन लगाएगा?

मैं चौराहे चौराहे पर ये प्रश्न उठाया करता हूं।
मैं अमर शहीदों का चारण उनके यश गाया करता हूं।
-सरलजी

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