शनिवार, 9 फ़रवरी 2013

जब मनुष्य असभ्य था तब नदियां स्वच्छ थी, आज मनुष्य सभ्य है तो नदियां अस्वच्छ और विषाक्त हैं-बेगड़ जी

दिनांक ८ फरवरी २०१३ को बान्द्राभान में तीसरे अंतर्राष्ट्रीय नदी महोत्सव का आयोजन किया गया। चार दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए नर्मदा समग्र के अध्यक्ष श्री अम्रतलाल बेगड़ जी ने कहा कि जब मनुष्य असभ्य था तब नदियां स्वच्छ थी। आज मनुष्य सभ्य है तो नदियां अस्वच्छ और विषाक्त हैं। उन्होंने कहा कि हमारी नदियों में रसायन बह रहा है। गंगा और यमुना आई.सी.यू में है। नदी और पेड़ के संबंध को व्यक्त करते हुए वे बोले कि नदी और पेड़ में भाई-बहन जैसा संबंध है। जैसे एक भाई अपनी बहन की रक्षा करता है ठीक वैसे ही पेड़ नदियों की रक्षा करतें हैं। यदि पेड़ ही ना होंगे तो नदियों को कौन बचाएगा। नदी प्रदूषण के लिए उन्होंने बढ़ती आबादी को जिम्मेवार बताया। उनके अनुसार बढ़ती जनसंख्या ने देश को नर्क बना दिया है और हमारी नदियों को प्रदूषित कर दिया है। वे कहते हैं कि नर्मदा ने मुझे कलाकार से लेखक बना दिया। उनका मानना है कि यदि कहीं नदियों की सौंदर्य प्रतियोगिता हो तो उसमें निश्चय ही नर्मदा को प्रथम स्थान प्राप्त होगा।

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