बुधवार, 9 जनवरी 2013

वही तो है...

हर कृत्य में;हर नृत्य में, जीवन की पर्त-पर्त में वही तो है।
राजा वही है रंक भी, मरहम वही है दंश भी,
नयन मीड़ देखो ज़रा, फूलों से निचुड़ते अर्क में, वही तो है....!
साधना भी वही;आराधन भी, उलाहना भी वही;प्रार्थना भी,
मौन हो बैठो ज़रा, ह्रदय के गहरे गर्त में, वही तो है....!
हार भी वही जीत भी, बैर भी वही प्रीत भी,
दांव खेलो तो सही, लगी हुई हर शर्त में वही तो है...!
-हेमन्त रिछारिया

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