बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

वेलेन्टाइन डे-"पारिवारिक एकता दिवस"


ईसा के जन्म के २६९ वर्ष बाद रोम देश के शासक क्लाडियस द्वितीय ने अपने सैनिकों के शादी करने पर पाबंदी लगा दी थी। उनके विचार से अविवाहित व्यक्ति ही अच्छे सैनिक बन सकते थे। रोम के एक चर्च के पादरी महान संत "वेलेन्टाइन" को यह कानून ईश्वरीय इच्छा के विरूध्द प्रतीत हुआ। संत वेलेन्टाइन को लगा कि यदि राजा के आदेश के पालन के कारण सैनिक विवाह ना कर सके तो वे वैश्याव्रत्ति की ओर प्रेरित होंगे या फिर दूसरे की स्त्रियों से अनैतिक संबंध स्थापित करने जैसा कुप्रयास करेंगे। राजा के आदेश के परिणामस्वरूप ज़ोर-जबरदस्ती से शारीरिक संबंध बनाने की प्रव्रत्ति ज़ोर पकड़ने लगी। विवाह की महत्ता को समझते हुए संत वेलेन्टाइन रात्रि के समय चर्च में सैनिकों का गुपचुप विवाह करवाने लगे। संत वेलेन्टाइन की शिक्षा थी कि पारिवारिक प्रेम एवं एकता से ही मानव सुखी रह सकता है। संत वेलेन्टाइन ने विवाह को अनिवार्य बताते हुए कहा कि पारिवारिक एकता के लिए ग्रहस्थ धर्म में प्रवेश अति आवश्यक है। जब क्लाडियस(द्वितीय) को यह पता चला तो उन्होंने राजा के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाकर संत वेलेन्टाइन को गिरफ़्तार करा लिया तथा उन पर राजद्रोह का मुकदमा चला कर संसार को परिवार बसाने एवं पारिवारिक एकता का संदेश देने वाले इस महान संत को उसके इस कार्य के लिए १४ फरवरी को फांसी की दे दी गई। कुछ वर्षों पश्चात १४ फरवरी को संत वेलेन्टाइन के महान त्याग व बलिदान के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए यह दिवस "वेलेन्टाइन डे" के रूप में मनाया जाने लगा। वर्तमान समय में यह दिवस अपना मूल स्वरूप खोकर वैश्वीकरण की आड़ में विक्रत हो गया है। आज के युवा इस महान पर्व का महत्व व मूल भावना समझे बिना इसे महज़ मनोरंजन एवं स्वच्छंद प्रेमालाप का सुअवसर मानते हुए मनाने लगे हैं जो कि सर्वथा अनुचित है। संत वेलेन्टाइन के प्रति सच्ची श्रद्दांजली यही होगी कि हम १४ फरवरी "वेलेन्टाइन डे" को "पारिवारिक एकता दिवस" के रूप में मनाएं।

-डा.जगदीश गांधी
प्रबंधक, सिटी मान्टेसरी स्कूल
लखनऊ (उ.प्र.)

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