शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012

"मेरा बेटा भगतसिंह मेरी गोद में आ बैठा"

भगतसिंह महाकाव्य के प्रकाशन के उपरांत जब सरल जी ने इसकी प्रथम प्रति शहीदे-आज़म भगतसिंह की पूज्य माता श्रीमती विद्यावती जी को भेंट की तो उस पुस्तक को मां ने अपनी गोद में रख लिया और बोलीं-"जिसे मैंने लाहौर में खोया था, उसे आज उज्जैन में पा लिया है। मुझे लगता है जैसे मेरा बेटा भगतसिंह मेरी गोद में आ बैठा हो और मुझसे बातें कर रहा हो।"

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