गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

लोकपाल

कल रात न्यूज़ चैनल पर लोकसभा की सीधी कार्रवाई के दौरान लोकतंत्र का मज़ाक बनता देखता रहा।
रात ठीक ११ बजे जहां अन्ना और भारतीय लोकतंत्र की तबीयत बिगडी़ वहीं लोकसभा में सरकार का लोकपाल बिल आंशिक संशोधनों के साथ ध्वनिमत से पारित हो गया। उधर अन्ना हजारे ने डाक्टर की सलाह मान कर इंजेक्शन ले लिया तो इधर लोकसभा में सरकार ने विपक्ष के सारे संशोधन रूपी इंजेक्शनों को एक शरारती बच्चे की मानिंद झटक कर गिरा दिया। अन्ना जल्दी ही स्वस्थ हो जाएंगे पर निकट भविष्य में सरकार की सेहत कैसी रहेगी ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। सपा,बसपा,और राजद ने अपने चित-परिचित अंदाज़ में सदन से वाक-आऊट कर अप्रत्यक्ष रूप से सरकार के हाथ मजबूत किए। उनकी अपनी राजनैतिक मजबूरियां जो थीं। वहीं दूसरी एनडीए भले ही ऊपर से ना सही, अंदर ही अंदर बहुत खुश होगा क्योंकि सरकार के इस कदम ने उसे सत्ता के एक पायदान और करीब ला खड़ा किया है। अब बात जनता की तो उसे इस सरकारी लोकपाल को अपनी हार के रूप में ना लेकर भ्रष्टाचार के विरूद्ध एक सकारात्मक पहल के रूप में लेना चाहिए और अपनी इस लडा़ई को जारी रखना चाहिए।
-हेमंत रिछारिया

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