शनिवार, 1 जनवरी 2011

भोर की उजास


भोर की उजास हो
मन में उल्लास हो
गम का प्रवास हो
खत्म ना मधुमास हो
विजय हर संघर्ष करें
हो जीवन में उत्कर्ष
मंगलमय हो आपका
आगामी नूतन वर्ष...!

-हेमंत रिछारिया

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