शनिवार, 1 जनवरी 2011

नव वर्ष की शुभकामना

नए के आगमन के लिये पुराने का विदा होना आवश्यक है क्योंकि पुराने के स्थान पर ही नए का अवतरण होता है। प्रक्रति ने हर वस्तु की आयु निर्धारित की है और आयु पूर्ण होने पर उसका नष्ट होना स्वाभाविक है। अस्तित्व की समस्त वस्तुओं का एक नियत समय होता है जब वे अपने पूर्ण यौवन पर होती हैं तत्पश्चात उनकी जरावस्था प्रारंभ हो जाती है और फिर एक दिन वे उसी में विलीन हो जातीं है जिससे उनका उद्गगम हुआ है। जन्म, व्रध्दि और क्षय प्रक्रति के तीन अनिवार्य नियम है। समस्त जड़ व चेतन इन्हीं नियमों के अधीन है, इसलिए हमें सदा पुराने की विदाई के लिये राजी रहना चाहिए। परन्तु इसका यह आशय कतई नहीं कि हम पुराने को विस्म्रत कर दें क्योंकि यदि हम अपने अतीत को भुला देंगें तो भविष्य भी हमें याद नहीं रखेगा। हमें अतीत को याद तो रखना चाहिए पर अतीत से संबंध नहीं। हमारा संबंध तो सदा वर्तमान से होना चाहिए क्योंकि जीवन अभी, यहीं और इसी क्षण में है। यदि मंज़िल प्राप्त करना है तो उसके लिए एक कदम आगे बढाने के साथ ही दूसरा कदम पीछे से उठाना भी आवश्यक है तभी गति संभव है, चाहे मनुष्य की हो या प्रक्रति की।
तो आइए कोशिश करें कि जिस हर्षोउल्लास के साथ हम नए का स्वागत करते हैं उसी हर्षोउल्लास के साथ पुराने को विदा दे सकें।

"सरल-चेतना" के सभी पाठकों को नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
-हेमंत रिछारिया(संपादक)

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