बुधवार, 6 जनवरी 2010

"आपको अधिकार न था"


शहीदे-आज़म भगत सिंह का पत्र

(३० सित. १९३० को भगतसिंह के पिता सरदार किशनसिंह ने ट्रिब्यूनल को एक अर्जी देकर बचाव पेश करने के लिए अवसर की मांग की। उससे आहत होकर भगतसिंह ने ४ अक्टूबर १९३० को अपने पिता को यह पत्र लिखा)

पूज्य पिता जी,

मुझे यह जानकर हैरानी हुई है कि आपने मेरे बचाव-पक्ष के लिए स्पेशल ट्रिब्यूनल को आवेदन भेजा है। यह खबर इतनी यातनामय थी कि मैं इसे खामोशी से बर्दाश्त नहीं कर सका। इस खबर ने मेरे भीतर की शांति भंग कर उथल-पुथल मचा दी है। मैं यह नहीं समझ सकता कि वर्तमान स्थितियॊं में और इस मामले पर आप किस तरह का आवेदन दे सकते हैं? आपका पुत्र होने के नाते मैं आपकी पैत्रक भावनाओं और इच्छाओं का पूरा सम्मान करता हूं। लेकिन इसके बावजूद मैं समझता हूं कि आपको मेरे साथ सलाह-मशविरा किये बिना ऐसे आवेदन देने का कोई अधिकार नहीं था।
पिता जी, मैं बहुत दु:ख का अनुभव कर रहा हूं। मुझे भय है आप पर दोषारोपण करते हुए या इससे बढ़कर आपके इस काम की निंदा करते हुए मैं कहीं सभ्यता की सीमाएं न लांघ जाऊं और मेरे शब्द ज़्यादा सख़्त न हों जाएं। लेकिन मैं स्पष्ट शब्दों में अपनी बात अवश्य कहूंगा। यदि कोई अन्य व्यक्ति मुझसे ऐसा व्यवहार करता तो मैं इसे गद्दारी से कम न मानता, लेकिन आपके संदर्भ में मैं इतना ही कहूंगा कि यह एक कमजोरी है; निचले स्तर की कमजोरी।

आपका
भगतसिंह

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