शुक्रवार, 18 दिसंबर 2009

मध्यप्रदेश जय हे....

जय जय मध्यप्रदेश जय हे !
विशालभारतवर्षह्रदय हे !
जय जय मध्यप्रदेश जय हे....
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विन्ध्याचलमेखला नर्मदा
वहति लोकजीवनं सर्वदा !
विततसतपुडा श्रंगश्रंखला
तव वनधनशोभासमुज्जवला !!
क्षिप्राचंबल नदी सदय हे !
जय जय .............
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जयति झाबुआलोकजीवनं
चित्रकूट तट रामकीर्तनमं !
कथयति सांची तवेतिहासं
खजुराहो तव कलाविलासमं !!
अभ्यारण-पुण्यपरिचय हे !
जय जय ....................
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कालिदासधरणी सुसंस्क्रता
तानसेन-संगीत-झंक्रता
तव विक्रम-संवत्सर-रूचिरा
विविध रत्नगर्भा वसुंधरा !!
पंचराज्य-वलयति-परिसर हे !
जय जय मध्यप्रदेश........

-श्रीनिवास रथ

कितने योग्य गडकरी

भारतीय जनता पार्टी में अध्यक्ष पद को लेकर चला आ रहा घमासान नितिन गडकरी के रूप में खत्म होता नज़र आ रहा है। परंतु बीजेपी में आए इस तूफान का यूं चुपके से गुज़र जाना कहीं आने वाली भयंकर तबाही का पूर्व संकेत तो नहीं? संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भाजपा के शीर्ष पद पर अपनी पसंद के अनुरूप नितिन गडकरी की ताजपोशी के लिये पार्टी के आला नेताओं को लगभग सहमत तो कर लिया है पर क्या वे गडकरी को इस पद के योग्य बना पाने में सफल होंगे? नितिन गडकरी मराठी मानुष के रूप में महाराष्ट्र में लोकप्रिय हो सकते हैं पर क्या वे देश के आम बीजेपी कार्यकर्ता की पहली पसंद हैं? जो व्यक्ति कभी चुनाव लडकर संसद के दरवाज़े तक नहीं पहुंचा और जिसके नेत्रत्व में पार्टी प्रदेश में अपनी हार बचा पाने में असफल रही क्या वो राष्ट्रीय अध्य्क्ष के रूप में पार्टी में नई जान फूंकने में सफल हो पाएगा? इन सब प्रश्नों के उत्तर आज नहीं तो कल गडकरी को अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाने वालों को खोजने ही होंगे। आज भाजपा को ऐसे सशक्त नेत्रत्व की आवश्यकता है जो ना सिर्फ दल की अंतर्कलह पर लगाम लगा सके बल्कि आम जनता के बीच पार्टी की गिरती साख को भी बचा सके। जिसके पास एक विचारधारा हो और जो निरूत्साहित कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार कर सके। हिंदुत्व कोई सांप्रदायिक विचारधारा ना होकर एक राष्ट्रवादी चिंतन है इस बात को जितने सटीक ढंग से संप्रेषित किया जाएगा उतना पार्टी विकास के नए आयाम तय करेगी और मजबूत होगी। परंतु कमोबेश हर अध्यक्ष हिंदुत्व की व्याख्या करने में असफ्ल साबित हुआ और पार्टी अपना जनाधार खोती रही। ऐसे मौके पर गोविंदाचार्य, उमा भारती, जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा जैसे नेताओं के मार्गदर्शन की कमी हमेशा खलती रहेगी। नितिन गडकरी इन चुनौतियों पर खरे उतरें ऐसी दुआ तो की ही जा सकती है पर यह दुआ कितनी कबूल होती है यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
- हेमंत रिछारिया