मंगलवार, 13 अक्तूबर 2009

एक दीया होता है

एक दीया होता है, जो संध्या की आगवानी में नन्ही बिटिया के द्वारा तुलसी के बिरवे के सामने संजोया जाता है।
एक दीया होता है, जो खतरे की सूचना देने वाले चौकीदार की तरह घने अंधकार में जलाया जाता है।
एक दीया होता है, जो बहन के द्वारा अपने भाई की आरती के लिये संजोया जाता है।
एक दीया होता है, जो हल्दी भरे अंग वाली बहू के द्वारा सुख और सम्रध्दि की कामना के साथ एक परिवार से दूसरे परिवार में लाया जाता है।
एक दीया होता है, जो धरती पर आने वाले नये इंसान के स्वागत में किसी बच्चे के जन्म लेने पर संजोया जाता है।
एक दीया होता है, जिसके सहारे कोई विरहिणी अपने पिया की याद में सारी जिंदगी काट देती है।
एक दीया होता है, जिसकी लौ के तले वर-वधू पहली बार सुहाग कक्ष में एक-दूसरे का मुख निहारते हैं।
एक दीया होता है, जो जीवन की संपूर्ण पूजा समाप्त होने के उपरांत प्रभु के चरणों में अर्पित किया किया जाता है।
और जब इन सब दीयों को एक कतार में रख दिया जाता है तो दीपावली का त्यौहार बन जाता है।

"सरल-चेतना" के सभी सुधि पाठकों को दीपपर्व की हर्दिक शुभकामनाएं- हेमंत रिछारिया (संपादक)


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