शनिवार, 17 मई 2008

हाईकु

बिन धुरी के
चल रही है चक्की
पिसेंगे सब

ग्यान गठरी
झर रही रेत सी
मन व्याकुल

हाईकु हंस
हौले से हवा हुआ
कांपा शैवाल

-डा. जगदीश व्योम
संपादक'हाईकु-दरपन'
दिल्ली

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