शनिवार, 17 मई 2008

पुस्तक-समीछा : गांधी-वध क्यों?


गांधी-वध क्यों? इस पुस्तक को ह्म सिक्के का दूसरा पहलू कह सकते है! अभी तक जो लोग नथूराम गोडसे को गांधी जी के हत्यारे के रूप में जानते थे,इस पुस्तक को पढ़ने के बाद वे भले ही उसे एक देशभक्त के रूप में स्वीकार ना करें पर इतना विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि वे नथूराम गोडसे को हत्यारे की शरेणी से अवश्य हटा देंगे!

गांधी-वध का कारण ना तो राजनीतिक द्वेश था और ना ही किसी दल विशेष का षडयंतर! गांधी-वध तो एक सामान्य हिन्दू के मन मे अपने भाइयोंं के परति हो रहे एकतरफा अत्याचार से उठी परतिशोध की ज्वाला का परिणाम था! शायद ऐसा ही कुछ गोडसे को फांसी देने वाली खंडपीठ मे शामिल जसटिस खोसला ने महसूस किया होगा! उनका कहना था-"नथूराम का वक्तव्य न्यायालय मे उपसिथित लोगों के लिये एक आकरषक वस्तु थी!खचाखच भरा न्यायालय इतना भावाकुल हुआ था कि उनकी आंहें और सिसकियां सुनने मे आती थी और उनके गीली-गीली आंखों से गिरने वाले आंसू साफ़ दिखाई देते थे! न्यायालय मे उपस्थित लोगों को यदि न्यायदान करने दिया जाता तो मुझे तनिक भी संदेह नहीं है कि उन्होने अधिक से अधिक संख्या में कहा होता कि नथूराम निरदोष है!
(गांधी-वध क्यों?,page no.48)
दरअसल हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और गांधी जी की मुस्लिम तुश्टिकरण की की नीती ने गोडसे के मन को अत्यंत पीडि़त किया!विभाजन के बाद गांधी जी की पाकिस्तान को ५५ करोड दिए जाने की ज़िद में किया गया अनशन एवं पाकिस्तान से निकले गये निरवासित हिंदओं के पृति गांधी जी का उपेछापूरण व्यवहार गांधी-वध के कारणों में से एक था! गांधी जी का अपने पृवचनोंं में यह कहना कि"मुसलमानो का संरछण होना चाहिये भले ही निरवासित हिंदुओं एवं सिक्खोंं को कितना ही कष्ट क्योंं ना उठाना पडे!" इस पृकार की बातें गोडसे के मन को दु:खी कर उसे पुन: एक काृंति के लिये विवश कर रही थी! यद्पि गोडसे के मन में गांधी जी के पृति सम्मान था! परंतु हिंदुओं के पृति उसका अनन्य पृरेम उसके सम्मान पर भारी पड रहा था! गोडसे का कहना था कि-" मैं जानता हूं कि गांधी जी ने देश के लिये बहुत कष्ट उठाये हैं जिसके लिये मैं उनके सामने नतमस्तक हूं परंतु इस काम का पुरूस्कार देश विभाजन तो नहीं हो सकता!"
गोडसे अपने काम के परिणाम के बारे में भली-भांति जानता था! इस विषय में उसने कहा था कि-" मैं जानता हूं कि लोग मेरी निंदा करेंगे,मुझसे घृणा करेंगे परंतु यदि देशभक्ति पाप है तो मैने यह पाप किया है और यदि पृशंसनीय है तो मैं अपने आप को उस पृशंसा का अधिकारी समझता हूं! मुझे विश्वास है कि मनुष्यों द्वारा स्थापित न्यायालय के ऊपर कोई न्यायालय हो तो उसमें मेरे काम को अपराध नहीं समझा जाएगा! मैने देश और जाति कि भलाई के लिए यह काम किया है! मैने उस व्यक्ति पर गोली चलाई जिसकी नीति से हिंदुओं पर घोर संकट आए और हिंदू नष्ट हुए!"
(गांधी-वध से उद्धृत)
अंततोगत्वा निष्करष कि रूप में इतना अवश्य कहा जा सकता है कि इस पुस्तक को बिना किसी पूरवागृह के पढ़ने के उपरांत कई पृकार की वंचनाओं का खंडन होता है!

10 टिप्‍पणियां:

dharmendra ने कहा…

भाईसाहब अगर ये किताब आपके पास हो या जहां से इसे प्राप्‍त किया जा सकता हो उसका पता देने का कष्‍ट करें। मेरे ई मेल आई डी पर मैं आपका आभारी रहूंगा।

बेनामी ने कहा…

dharmendrabchouhan@gmail.com

dha_bab@rediff.com

बेनामी ने कहा…

main nathuram ji ke har ek sabd se sahmat hoon kisi jaati vises ki bhavna se uper uthkar gandhi ji ko karya karna chhiye tha.kyoki voh ek rastrapita the jinko rastra pita pure desh ne bananya tha na ki ek sampraday ne.hatya ek apradh avasya hai lekin rastra ki akhandta ke liye hui hatya koi jurm nahi

vishwajeetsingh ने कहा…

महात्मा गोडसे की इस पुस्तक मेँ गांधी वध के कारणोँ की सच्चाई दी गई है, जो चिँतन करने योग्य हैँ । यदि श्रीगोडसे गांधीजी का वध न करते तो देश ओर ज्यादा टुकडोँ मेँ बट जाता । महात्मा गोडसे अखण्ड भारत के अनन्य उपासक थेँ । उन्होँने तो अपने अन्तिम समय मेँ भी अखण्ड भारत का स्वप्न देखा था । फाँसी लगने से पाँच मिनट पूर्व उन्होँने अपने भाई दत्तात्रेय को हिदायत देकर कहा था कि " मेरी अस्थियोँ को पवित्र सिन्धु नदी मेँ उस समय प्रवाहित करना जब सिन्धु नदी भारत के झंडे तले स्वतन्त्र रूप से बहने लगे । भले ही इसमेँ कितने भी वर्ष लग जायेँ, कितनी भी पीढियाँ जन्म लेँ, लेकिन तब तक मेरी अस्थियोँ को विसर्जित मत करना । आज भी महात्मा गोडसे का अस्थि कलश पूना मेँ रखा हुआ भारत के पुनः अखण्ड होने की बाट देख रहा है ।
क्रान्तिवीर महात्मा गोडसे के आत्मबलिदान को श्रद्धांजली देने के लिए मैने " अखण्ड भारत के स्वप्नद्रष्ट - वीर नाथूराम गोडसे " भाग - एक, दो, तीन लिखा है जिसे www.vishwajeetsingh1008.blogspot.com पर पढा जा सकता है ।
अखण्ड भारत के अनन्य उपासक, सच्चे समाज सुधारक, यशस्वी पत्रकार और राष्ट्रीय क्रान्तिवीर महात्मा श्रीनाथूरामजी गोडसे को मेरा शत - शत नमन । वन्दे मातरम्

बेनामी ने कहा…

are gandhi vadh kyo book online milti hai kya download ke liye.yadi nahi to uplabdh karvao beacause ise maximum logo tak pahuchao tabhi log samaj payege sachai.

Komal ने कहा…

yahaan aap is book ko padh sakte hai ..jarur padhe aur apne dosto ko bhi padhaye.

http://www.shreshthbharat.in/literature/gandhi-vadh-kyo/

बेनामी ने कहा…

Ab mai kya kahu bas itna kehna chahta hu ki Ghandhi aur Nehru ki vajah se Hindustan wah nahi jo kabhi tha Sri Godse ne ek gandhi ko mara per gandhi ne Netaji, Bhagat Singh, Sukhdev aur Rajguru ke sath sath lakhe hinduon ke aatamao ki hatya ki hai Eshwar unhe kabhi maf nahi karega. Jai hind Jai bharat Vande matram.

K. S. ने कहा…

kavi ji yah kitab kaha milegi kripiya jarur bataye.

बेनामी ने कहा…

Kavi ji kripiya yah kitab kaha milegi bataye............?

Mitra Sharma ने कहा…

ye to jahir hai ki mahatma gandhi angrejo ka tota tha or ek baat meri samajh me aayi ke desh ke ajadi ke samay we log hi bade bade post pe the jo england videsh me padh kar aaye the jinme aap mahatma gandhi, jawahr lal nehru, ambedkar etc the or hamara jo sambidhan bana he wo bhi lagbhag angrejo ke sambidhan ki nakal hi hai

nathuram ki pustka gandhi badh kahan milegi bataye