गुरुवार, 15 मई 2008

मुझमे ज्योति और जीवन है


मुझमे ज्योति और जीवन
मुझमे यौवन ही यौवन है

मुझे बुझाकर देखे कोई
बुझने वाला दीप नही मै
जो तट पर मिल जाया करती
ऐसी सस्ती सीप नही मै
शब्द शब्द मेरा मोती है
गहन अरथ ही सच्चा धन है
मुझमे ज्योति और जीवन है...

रुक जाने को चला नही मै
चलते जाना जीवन करम है
बुझ जाने को जला नही मै
जलते जाना नित्य नियम है
मै परयाय उजाले का हू
अंधियारे से चिर अनबन है
मुझमे ज्योति और जीवन है...

वरश मास दिन रहा भुनाता
हर पल का उपयोग किया है
तुम हिसाब कर लो देखोगे
लिया बहुत कम अधिक दिया है
यही गनित मेरे जीवन का
यही रहा मेरा चिन्तन है
मुझमे ज्योति और जीवन है...

-सरल जी

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