सोमवार, 19 मई 2008

मधुशाला

(१)
मुसलमान ओ' हिंदू हैं वो
एक मगर उनका प्याला
एक मगर उनका मदिरालय
एक मगर उनकी हाला

दोंनों रहते एक न जब तक
मस्ज़िद-मंदिर में जाते
बैर बढ़ाते मस्ज़िद-मंदिर
मेल कराती 'मधुशाला'
(२)
पितृ पछ में पुतृ उठाना
अरध्य ना कर में पर प्याला
बैठ कहीं पर जाना गंगा-
सागर में भरकर हाला

किसी जगह की मिट्टी भीगे
तृप्ती मुझे मिल जाएगी
तरपण-अरपण करना मुझको
पढ़-पढ़कर तू 'मधुशाला'

डा. हरिवंशराय बच्चन
('मधुशाला' से साभार)

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