शुक्रवार, 16 मई 2008

क्या क्या बांटा

आओ सोचें हमने अब तक, किसको क्या क्या बांटा
हमने कुछ दु:ख दरद बटाए या बस सन्नाटा बांटा

बांट चूट कर रोटी खाना जिसने हमको सिखलाया
मां तब किसके हिस्से आई था जब दरवाज़ा बांटा

आग लगी शहर मे जब गली मुहल्ले थे भूखे
तब ह्मने आगी ही बांटी या थोड़ा सा आटा बांटा

कुछ सपने घर मे पलते थे कुछ आए डोली के संग
सास-बहू,ननद-भाभी ने क्योंं घर का चूल्हा बांटा

नदियां-नाले, झील-समंदर,ताल-तलैया का पानी
किसने बांटा, ह्मने 'वाते' खुद अपना कुनबा बांटा

-विजय वाते
आई.जी. पुलिस
भोपाल,मध्यपरदेश

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