गुरुवार, 15 मई 2008

कवि-परिचय-

"प्रेरणा शहीदों से अगर हम नहीं लेंगे
आज़ादी ढ़लती हुई सांझ हो जाएगी

यदि वीरों की पूजा नहीं क्रेगे तो

सच मानों वीरता बांझ हो जाएगी"

-सरल जी
शहीदों का चारण कहे जाने वाले सरल जी का जन्म १ जनवरी १९१९ को गुना जिले के अशोकनगर में हुआ था! सरल जी ने जीवन भर सिर शहीदों के जीवन पर ही अपनी काव्य साधना की! सरल जी अब तक के सबसे ज़्यादा महाकाव्य लिखने वाले लेखकों में से है! सरल जी के मुख्य महाकाव्य है-"क्रांति- गंगा","चंदृशेखर आज़ाद" एवं "शहीद भगत सिंह"!



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हेमंत रिछारिया
संपादक
सरल चेतना पत्रिका
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